आखिर इन किसानों पर कब रहमत बरसाएंगे पीएम मोदी

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नई दिल्ली/नोएडा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में किसानों को उनकी उपज का डेढ़ गुना कीमत देने का वायदा किया. यूपी चुनाव में भी उन्होंने किसानों की कर्जमाफी का वायदा किया. उनके वायदे के मुताबिक़ यूपी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही किसानों से किया वायदा निभाया और सभी सीमांत किसानों का एक लाख रूपये तक का कर्ज माफ़ करने का निर्णय लिया. किसानों की खराब हो रही फसल को खरीदने की पूरी कोशिश हो रही है. आलू की खराब हो रही उपज को भी सरकार ने खरीदने का प्लान बना लिया है और कुछ जगहों पर इसकी खरीद शुरू भी हो गयी है. गेहूं की खरीद पर लिमिट खत्म कर सरकार ने यह कह दिया है कि किसान जितना भी चाहें गेहूं बेचें, सरकार उन्हें खरीदने को तैयार है.

जाहिर है कि इन फैसलों के कारण इसे भाजपा सरकारों की तरफ से किसानों के बारे में लिए गए सबसे बड़ा निर्णय बताया जा रहा है. भाजपा इसका डंका भी पीट रही है. जाहिर है कि वह इसका फायदा गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में भी उठाना चाहेगी. वह बांटेगी कि किस तरह उसने किसानों का वायदा निभाया. इसका सकारात्मक असर किसानों पर पड़ना तय माना जा सकता है. लेकिन इसी बीच सवाल यह है कि देश की राजधानी दिल्ली में तमिलनाडु के किसान पिछले एक महीने से ज्यादा समय से धरना दे रहे हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार की तरफ से कोई भी उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा है. तो क्या यह सच है कि सरकार को केवल उन्हीं किसानों का दर्द सुनाई पड़ता है जहां चुनाव होने वाले होते हैं. अगर कहीं चुनाव नहीं होने वाले होंगे तो क्या वहां के किसानों का दर्द कोई नहीं सुनने वाला. कम से कम सरकार के कामकाज का तरीका तो यही बता रहा है.

उत्तर प्रदेश के भदोही से सांसद और भाजपा के किसान मोर्चा के अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह मस्त से जब इस संदर्भ में बात की गयी तो उन्होंने बताया कि सरकार देश के किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए संकल्पबद्ध है. उन्होंने गिनाया कि किस तरह सरकार ने कृषि बीमा योजना, नीम कोटेड यूरिया योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, किसान क्रेडिट कार्ड योजना और खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का काम किया है. इससे सरकार आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाकर दोगुना तक करने का काम कर रही है.

लेकिन तमिलनाडु के किसानों का कोई दर्द सुनने के लिए क्यों नहीं जा रहा है. कांग्रेस नेता मीम अफजल ने कहा कि सरकार को केवल उन्हीं राज्यों के किसानों की याद आ रही है जहां वोट लेने हैं. जहां चुनाव नहीं हैं उसके बारे में सरकार की उपेक्षा किसानों पर भारी पड़ने वाली है. उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने तमिलनाडु के किसानों के बीच पहुंचकर उनकी बात उठाने की पूरी कोशिश की. लेकिन सिर्फ अपने ही प्रचार में व्यस्त सरकार अभी तक कुछ सुनने को तैयार नहीं है.

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